पुनर्नवा को सही तरीके से, सही समय पर और सही चीज के साथ लेना बहुत जरूरी है, तभी इसका पूरा फायदा मिलता है। आयुर्वेद इसे सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि एक विज्ञान की तरह देखता है।
आयुर्वेदिक गुणधर्म:
* रस (Taste): तिक्त (कड़वा), मधुर (मीठा), कषाय (कसैला)
* गुण (Qualities): लघु (हल्का), रूक्ष (सूखा)
* वीर्य (Potency): उष्ण (गर्म)
* विपाक (Post-digestive effect): कटु (तीखा)
* प्रभाव (Special Action): शोथघ्न (सूजन कम करने वाला) और मूत्रल (Diuretic)
इन गुणों की वजह से यह शरीर में बढ़े हुए कफ और वात दोष को शांत करता है, जो सूजन और पानी जमा होने के मुख्य कारण होते हैं।
इस्तेमाल करने की सही विधि:
* Best Form: सबसे असरदार इसका 'चूर्ण' (powder) या घर पर बनाया गया 'काढ़ा' (decoction) होता है, क्योंकि शरीर इसे आसानी से सोख लेता है। अगर आप यात्रा कर रहे हैं या व्यस्त हैं, तो 'टैबलेट' या 'घनवटी' एक अच्छा विकल्प है।
* Best Time: शरीर से गंदगी निकालने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट है। अगर आपको एसिडिटी की समस्या है, तो आप इसे खाना खाने के आधे घंटे बाद ले सकते हैं।
* अनुपान (किसके साथ लें): इसे हल्के गर्म पानी के साथ लेना सबसे सामान्य और प्रभावी तरीका है। खून की कमी के लिए इसे शहद के साथ और शरीर को ताकत देने के लिए दूध के साथ भी लिया जा सकता है।
* Dosage: सामान्य तौर पर, 3-5 ग्राम चूर्ण (लगभग 1 चम्मच) दिन में दो बार लिया जा सकता है। टैबलेट ले रहे हैं तो 1-2 गोली दिन में दो बार। हमेशा किसी वैद्य की सलाह से शुरू करें।
* Duration: इसके नतीजे दिखने में थोड़ा समय लगता है। सूजन या पानी जमा होने जैसी समस्याओं में 2-4 हफ्तों में फर्क दिखना शुरू हो सकता है, लेकिन स्थायी लाभ के लिए कम से कम 3 महीने तक इसका सेवन करना चाहिए।