बाज़ार की दवाई सबके लिए एक जैसी होती है। हमारी नहीं।
आयुर्वेद में हर दवाई 6 कारकों पर निर्भर होती है — जानें कैसे
कारक १
कारक २
कारक ३
कारक ४
कारक ५
कारक ६
परिणाम
आपकी दवाई
वात, पित्त या कफ — प्रकृति यह तय करती है कि शरीर औषधि को कैसे ग्रहण करेगा। वाती व पैत्तिक व्यक्ति की दवाई गुण, रस और वीर्य में अलग होती है।
बच्चों को कोमल (बाल-भैषज्य), युवाओं को शक्तिशाली और वृद्धों को शक्तिवर्धक रसायन की ज़रूरत होती है। एक ही dose सबके लिए नहीं।
औषधि की मात्रा शरीर के अनुपात से तय होती है। स्थूल (मोटे) व्यक्ति को कृश (पतले) से अलग अनुपात और योग दिए जाते हैं।
पहाड़ी, मैदानी और तटीय क्षेत्र की मिट्टी, जल और भौगोलिक स्थिति शरीर को अलग तरह प्रभावित करती है। स्थान बदलने पर दवाई भी बदल सकती है।
ग्रीष्म में शीतवीर्य औषधि, शीत ऋतु में उष्णवीर्य। वर्षा, शरद, हेमंत — हर ऋतु में दोष अलग तरह उभरते हैं, इसलिए दवाई का स्वरूप बदलता है।
आर्द्र (humid) वातावरण कफ बढ़ाता है जबकि शुष्क (dry) वात बढ़ाता है। दो शहरों के रोगियों की दवाई एक जैसी नहीं हो सकती।
गर्म व शुष्क जलवायु, वात-पित्त प्रकृति → शीतवीर्य औषधि + रसायन
आर्द्र जलवायु, कफ प्रकृति → कफ-नाशक, उष्णवीर्य योग + दीपन
ठंडी जलवायु, वात प्रकृति → वात-शमन + बृंहण + मेदुर नाशक
→ एक ही रोग, तीन अलग दवाइयाँ — यही है असली, व्यक्तिगत आयुर्वेद