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एक ही बीमारी में सबकी दवाई एक जैसी क्यों नहीं हो सकती?
आयुर्वेद में दवाई आपकी प्रकृति, उम्र, मौसम और स्थान के अनुसार बनती है। जैसे — कमर दर्द में वात प्रकृति के व्यक्ति को अलग औषधि मिलेगी और पित्त प्रकृति को अलग। इसीलिए हम हर मरीज़ की दवाई नए सिरे से बनाते हैं।
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Nadi Pariksha
प्राचीन नाड़ी विज्ञान द्वारा रोग निदान
Photo Diagnosis
वैद्य द्वारा जीभ,नेत्र और चेहरे का विश्लेषण
Custom Medicine
आपकी प्रकृति के अनुसार विशेष औषधि
Prakriti Analysis
वात, पित्त, कफ — अपनी प्रकृति जानें
Symptom Checker
लक्षणों से बीमारी व इलाज जानें
Follow-up Care
नियमित follow-up व progress tracking
Yoga Classes
लाइव ऑनलाइन या ऑफलाइन योग साधना
Naturopathy & Detox
मिट्टी-जल चिकित्सा व पंचतत्व डिटॉक्स
बाज़ार की दवाई सबके लिए एक जैसी होती है। हमारी नहीं।
आयुर्वेद में हर दवाई 6 कारकों पर निर्भर होती है — जानें कैसे
आपका शरीर अलग है,
तो दवाई भी अलग होगी
कारक १
कारक २
कारक ३
कारक ४
कारक ५
कारक ६
परिणाम
आपकी दवाई
हम अलग क्यों हैं?
६ दवाई निर्माण के छः मुख्य कारक
१. प्रकृति (Body Constitution)
वात, पित्त या कफ — प्रकृति यह तय करती है कि शरीर औषधि को कैसे ग्रहण करेगा। वाती व पैत्तिक व्यक्ति की दवाई गुण, रस और वीर्य में अलग होती है।
२. आयु (Age)
बच्चों को कोमल (बाल-भैषज्य), युवाओं को शक्तिशाली और वृद्धों को शक्तिवर्धक रसायन की ज़रूरत होती है। एक ही dose सबके लिए नहीं।
३. वज़न (Body Weight)
औषधि की मात्रा शरीर के अनुपात से तय होती है। स्थूल (मोटे) व्यक्ति को कृश (पतले) से अलग अनुपात और योग दिए जाते हैं।
४. स्थान / देश (Place)
पहाड़ी, मैदानी और तटीय क्षेत्र की मिट्टी, जल और भौगोलिक स्थिति शरीर को अलग तरह प्रभावित करती है। स्थान बदलने पर दवाई भी बदल सकती है।
५. तापमान / काल (Season)
ग्रीष्म में शीतवीर्य औषधि, शीत ऋतु में उष्णवीर्य। वर्षा, शरद, हेमंत — हर ऋतु में दोष अलग तरह उभरते हैं, इसलिए दवाई का स्वरूप बदलता है।
६. वातावरण (Atmosphere)
आर्द्र (humid) वातावरण कफ बढ़ाता है जबकि शुष्क (dry) वात बढ़ाता है। दो शहरों के रोगियों की दवाई एक जैसी नहीं हो सकती।
💡 उदाहरण: मधुमेह (Sugar) के तीन मरीज़ — एक रोग, तीन दवाइयाँ
गर्म व शुष्क जलवायु, वात-पित्त प्रकृति → शीतवीर्य औषधि + रसायन
आर्द्र जलवायु, कफ प्रकृति → कफ-नाशक, उष्णवीर्य योग + दीपन
ठंडी जलवायु, वात प्रकृति → वात-शमन + बृंहण + मेदुर नाशक
→ एक ही रोग, तीन अलग दवाइयाँ — यही है असली, व्यक्तिगत आयुर्वेद
❌ बाज़ार product से क्या होता है?
- • लक्षण दब जाते हैं, रोग अंदर रहता है
- • दवाई पर निर्भरता बढ़ती है
- • Side-effects → नए रोगों का जन्म
- • वर्षों दवाई, कोई permanent relief नहीं
✅ मेरी वैद्यशाला की दवाई से क्या होता है?
- • रोग की जड़ से उखाड़कर इलाज
- • रोग-प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि
- • 100% प्राकृतिक — कोई side-effect नहीं
- • दवाई छूटने के बाद भी स्वास्थ्य बरकरार