अश्वगंधा को सही तरीके, सही समय और सही चीज के साथ लेना बहुत जरूरी है, तभी इसका पूरा फायदा मिलता है। आयुर्वेद में हर जड़ी-बूटी के गुण और उसे लेने की विधि का खास महत्व है।
आयुर्वेदिक गुणधर्म:
* रस (Rasa/Taste): तिक्त (Bitter), कटु (Pungent), मधुर (Sweet)
* गुण (Guna/Qualities): लघु (Light), स्निग्ध (Oily)
* वीर्य (Virya/Potency): उष्ण (Hot)
* विपाक (Vipaka/Post-digestive effect): मधुर (Sweet)
* प्रभाव (Prabhava/Special Action): बल्य (ताकत देने वाला), रसायन (कायाकल्प करने वाला), वात-कफ शामक (वात और कफ दोष को शांत करने वाला)।
इस्तेमाल करने की सबसे सही विधि:
* Best Form (सबसे अच्छा रूप): सबसे असरदार रूप इसका 'चूर्ण' (powder) ही है, क्योंकि यह सीधे जीभ के संपर्क में आता है और इसका पाचन वहीं से शुरू हो जाता है। हालांकि, जिन्हें इसका स्वाद पसंद नहीं, वे Tablet या Capsule भी ले सकते हैं, लेकिन चूर्ण हमेशा पहली पसंद होनी चाहिए।
* Best Time (सबसे सही समय): अगर आप इसे तनाव और अच्छी नींद के लिए ले रहे हैं, तो रात को सोने से एक घंटा पहले लेना सबसे अच्छा है। अगर आपका मकसद दिनभर की ऊर्जा और स्टैमिना है, तो सुबह नाश्ते के बाद ले सकते हैं।
* Anupana (किसके साथ लें): अश्वगंधा की शक्ति को सही 'अनुपान' (carrier) कई गुना बढ़ा देता है।
* दूध के साथ: यह सबसे आम और असरदार तरीका है। दूध अश्वगंधा के पौष्टिक गुणों को शरीर की गहराई तक ले जाता है और उसकी गर्मी को संतुलित करता है।
* घी या शहद के साथ: वात दोष को शांत करने और शरीर को अंदर से चिकनाई देने के लिए घी के साथ लेना फायदेमंद है। शहद इसके गुणों को तेजी से शरीर में फैलाता है।
* Dosage (मात्रा): सामान्य तौर पर, दिन में 1-2 बार, 3-5 ग्राम (लगभग 1 चम्मच) चूर्ण या 1-2 टैबलेट लेना सुरक्षित है। हमेशा कम मात्रा से शुरू करें।
* Duration (अवधि): असर देखने के लिए कम से कम 3 महीने तक नियमित रूप से लें। हर 3 महीने के बाद 15-20 दिन का break देना अच्छा माना जाता है।