आयुर्वेद के महान ग्रंथ 'शारंगधर संहिता' में कैशोर गुग्गुलु का जो योग बताया गया है, वो सिर्फ जड़ी-बूटियों का मिश्रण नहीं, बल्कि एक दिव्य विज्ञान है। इसमें हर एक चीज़ को एक खास मकसद से डाला गया है, ताकि ये सब मिलकर वो असर पैदा कर सकें जो कोई अकेली जड़ी-बूटी कभी नहीं कर सकती। यह एक सेना की तरह है, जहाँ हर सैनिक की अपनी एक भूमिका है।
इसके मुख्य योद्धा हैं:
• त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा): यह इस योग की नींव है। इसे शरीर का 'detox team' समझिए। यह पेट को साफ करता है, आंतों में जमे हुए 'आम' (toxins) को बाहर निकालता है और खून की पहली सफाई करता है। इसके बिना, बाकी जड़ी-बूटियों का असर आधा रह जाएगा।
• गिलोय (गुडूची): इसे 'अमृता' भी कहते हैं। यह शरीर के immune system को intelligent बनाती है। यह सिर्फ कीटाणुओं से नहीं लड़ती, बल्कि शरीर की अपनी कोशिकाओं को शांत करती है जो गलत inflammation पैदा कर रही हैं (जैसे gout और arthritis में)। यह uric acid को कम करने में महारथी है।
• गुग्गुलु (शुद्ध): यह इस योग का राजा है। गुग्गुलु एक गोंद (resin) है जिसमें जबरदस्त anti-inflammatory गुण होते हैं। यह जोड़ों में जाकर सूजन और दर्द को खींच लेता है। इसकी 'लेखन' (scrapping) प्रकृति खून में जमे uric acid crystals और cholesterol को खुरचकर बाहर निकालती है।
• त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली): यह इस सेना के 'transport' और 'communication' का काम करता है। यह शरीर की 'अग्नि' (metabolic fire) को तेज करता है, जिससे बाकी सभी जड़ी-बूटियाँ ठीक से पचती हैं और खून में absorb होकर शरीर के कोने-कोने तक पहुँचती हैं। इसके बिना, दवा का पूरा असर नहीं होगा।
• अन्य जड़ी-बूटियाँ (विडंग, निशोथ, दंती): ये सहायक सैनिक हैं जो खून को साफ करने (रक्त शोधक), कीड़ों को मारने और toxins को शरीर से बाहर निकालने (विरेचन) में मदद करते हैं।
यह कोई साधारण मिश्रण नहीं है। त्रिफला शरीर को साफ करके एक साफ कैनवास तैयार करता है, गिलोय immune system को निर्देश देता है, त्रिकटु दवा को सही जगह पहुँचाता है और फिर गुग्गुलु अपना मुख्य काम - सूजन और दर्द को खत्म करना - करता है। यही आयुर्वेद का synergistic effect है, जहाँ 1+1=11 हो जाता है। Modern science आज तक ऐसी 'multi-target' formulation नहीं बना पाया है।