आयुर्वेद के महान ग्रंथ 'भैषज्य रत्नावली' में अर्श (बवासीर) के लिए जिन शक्तिशाली योगों का वर्णन है, अर्शी घन वटी उसी ज्ञान का निचोड़ है। यह सिर्फ एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि एक पूरी सेना है जो समस्या की जड़ पर हमला करती है। इसे बनाने वाले ऋषियों ने हर एक घटक को बहुत सोच-समझकर चुना था।
इसके मुख्य सैनिक हैं:
• शुद्ध रसौत (Berberis aristata): इसे दारुहल्दी का सत भी कहते हैं। यह इस योग का सेनापति है। इसका मुख्य काम है खून को बहने से रोकना (रक्तस्तंभक) और सूजन को खत्म करना। यह एक बेहतरीन antiseptic भी है, जो infection को रोकता है।
• निम्बोलि (Azadirachta indica): नीम को 'सर्व रोग निवारिणी' कहा गया है। निम्बोलि में anti-bacterial और anti-inflammatory गुण कूट-कूट कर भरे हैं। यह मस्सों में होने वाली खुजली, जलन और दर्द को शांत करती है और उन्हें सुखाने में मदद करती है।
• बकायन (Melia azedarach): यह एक शक्तिशाली कृमिनाशक और रक्तशोधक (blood purifier) है। पेट में कीड़े होना भी बवासीर का एक छिपा हुआ कारण हो सकता है। बकायन उस जड़ को ही खत्म कर देता है और खून को साफ करके healing process को तेज करता है।
• हरीतकी (Terminalia chebula): आयुर्वेद में इसे 'माँ' का दर्जा दिया गया है। बवासीर का सबसे बड़ा कारण है कब्ज। हरीतकी पेट को साफ करती है, आंतों की mouvement को सुधारती है और मल को नरम बनाती है, जिससे मस्सों पर कोई दबाव नहीं पड़ता।
• खूने-खराबा (Daemonorops draco): इसका नाम ही इसका काम बताता है। यह एक पेड़ से निकलने वाला गोंद (resin) है जो बहते हुए खून को तुरंत रोकने की अद्भुत क्षमता रखता है। यह मस्सों की बाहरी परत पर एक protective layer बनाकर उन्हें जल्दी सुखाने में मदद करता है।
यह कोई साधारण मिश्रण नहीं है। जब ये सभी जड़ी-बूटियां एक साथ 'घन वटी' के रूप में आती हैं, तो एक synergistic effect पैदा होता है। हरीतकी पेट साफ करती है ताकि रसौत और निम्बोलि अपना काम ठीक से कर सकें। बकायन खून साफ करता है ताकि खूने-खराबा की healing power दोगुनी हो जाए। यह एक ऐसी जुगलबंदी है जो अकेली कोई भी दवा कभी नहीं कर सकती।