किसी भी जड़ी-बूटी को सही तरीके से इस्तेमाल करना उतना ही ज़रूरी है जितना कि उसके फायदों को जानना। आयुर्वेद के अनुसार सफ़ेद मूसली के गुण इस प्रकार हैं:
• रस (Rasa/Taste): मधुर (मीठा)
• गुण (Guna/Qualities): गुरु (भारी), स्निग्ध (चिकना)
• वीर्य (Virya/Potency): शीत (ठंडी तासीर)
• विपाक (Vipaka/Post-digestive effect): मधुर (मीठा)
• प्रभाव (Prabhava/Special Action): वृष्य (Aphrodisiac), बल्य (शक्तिवर्धक)
अब जानते हैं इसे इस्तेमाल करने का सबसे सही तरीका:
• Best Form (सबसे अच्छा रूप): चूर्ण (Powder) इसका सबसे असरदार रूप है। जब आप इसे दूध या शहद के साथ लेते हैं, तो यह शरीर में बहुत जल्दी और पूरी तरह से absorb होता है। Tablet सिर्फ सुविधा के लिए है, असली ताकत चूर्ण में ही है।
• Best Time (लेने का सही समय): दिन में दो बार — सुबह नाश्ते के बाद और रात को सोने से लगभग एक घंटा पहले। खाली पेट लेने से कुछ लोगों को भारीपन महसूस हो सकता है।
• Anupana (किसके साथ लें): इसका सबसे अच्छा अनुपान है गर्म दूध। दूध की स्निग्धता और मिठास, मूसली के गुणों को शरीर की सबसे गहरी धातुओं तक ले जाने में मदद करती है। दूध उपलब्ध न हो तो आप इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं।
• Dosage (कितनी मात्रा): शुरुआत में दिन में दो बार 3-5 ग्राम (लगभग 1 छोटी चम्मच) चूर्ण पर्याप्त है।
• Duration (कितने समय तक): यह कोई 2 दिन की magic pill नहीं है। यह जड़ पर काम करती है। स्थायी और गहरे परिणाम देखने के लिए इसे कम से कम 3 महीने तक नियमित रूप से लेना ज़रूरी है।