हम सोचते हैं कि यह बीमारी बाहर से आए किसी बैक्टीरिया की वजह से होती है, लेकिन सच तो यह है कि हमने खुद अपने शरीर के अंदर इसके लिए माहौल तैयार किया है। यह हमारी अपनी जीवनशैली का नतीजा है, जिसे जानकर आपको हैरानी होगी।
Ayurveda के अनुसार इसके मुख्य कारण हैं:
• दोषों का असंतुलन: बहुत ज़्यादा तीखा, खट्टा, तला हुआ और मसालेदार खाना खाने से पित्त दोष भड़क उठता है, जो जलन पैदा करता है। वहीं, रूखा-सूखा भोजन, ज़्यादा तनाव और natural urges (जैसे पेशाब) को रोकने से वात दोष बढ़ जाता है, जो दर्द और रुकावट का कारण बनता है।
• अग्निमांद्य और आम (Toxins): जब हमारी पाचन-शक्ति (अग्नि) कमजोर होती है, तो खाना ठीक से पचता नहीं और 'आम' नाम का एक चिपचिपा जहरीला पदार्थ बनता है। यह 'आम' शरीर के channels में जाकर रुकावट पैदा करता है और infection के लिए एक breeding ground तैयार करता है।
हमारी Modern Lifestyle इसे कैसे बढ़ा रही है:
• Processed Food: पैकेट में बंद खाने, मैदे से बनी चीजों और chemical preservatives से भरपूर आहार हमारे शरीर में सूजन (inflammation) को कई गुना बढ़ा देते हैं।
• Chronic Stress: लगातार तनाव में रहने से Cortisol hormone का level बिगड़ जाता है, जो हमारे immune system को कमजोर कर देता है और शरीर infection से लड़ नहीं पाता।
• Pharma Side-Effects: यह सबसे बड़ा और छिपा हुआ कारण है। बहुत से मामलों में Painful Urination का असली कारण वो chemical-based दवाइयां होती हैं जो किसी दूसरी बीमारी के लिए ली गई थीं। Antibiotics अच्छे और बुरे, दोनों बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं, जिससे शरीर की अपनी रक्षा-प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और infection बार-बार लौटकर आता है।
यह एक कड़वा सच है कि हमारी lifestyle का एक-एक फैसला, हमारे खाने की एक-एक बाइट और तनाव का हर एक पल इस दर्दनाक बीमारी को न्योता दे रहा है।